बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के वास्तविक लाभार्थी कौन 

बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के वास्तविक लाभार्थी कौन 
बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के वास्तविक लाभार्थी कौन 

रामप्रवेश चौधरी (संपादक) 

राजगांगपुर से बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना की पोल खोलता एक मामला सामने आया है जहाँ एक पुत्र जगमोहन को बीमार ओर अपाहिज माता पिता की चिंता सताने लगी है। 

सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर शहर में 23 वर्षीय पुत्र जगमोहन बिमारी की वजह से बिस्तर पर पड़े अपने माता पिता के लिए चिंतित है। राजगांगपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 निवासी जगमोहन को अपनी मां और पिता की इलाज की चिंता सता रही है। वह अपने बीमार पिता और मां के इलाज के लिए धन का इंतजाम करने में खूद को असफल महसूस कर रहा है। 

जगमोहन के पिता 2020 में नगर पालिका से सेवानिवृत्त हुए है।  उनके पिता की सेवानिवृत्ति से पहले ही उनकी दृष्टि चली गई और उन्हें शीघ्र स्वस्थ होने के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहाँ उन्हें कोई सफलता नहीं मिली,जिसके बाद पैसे की कमी के कारण उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया।  राउरकेला, सुंदरगढ़, बुर्ला के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा कराने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी।

बी बीमारी के कारण बीमारी और भी बढ़ती गई,नतिजा यह हुआ कि उन्होने पूरी तरह से बिस्तर पकड़ ली। अर्थ के अभाव में उनका उचित इलाज नहीं हो पा रहा है,दूसरी ओर बिमारी बढ़ती जा रही है ।अजनबी लोगों को बार-बार सरकारी अस्पतालों में जाना पड़ता है। पैसे की कमी के कारण उनके लिए दवा खरीदना संभव नहीं है। मां उषा परिडा़ ने बताया कि वह 10 साल से बिस्तर में पडे हुए है।  पैसों की कमी के कारण ट्यूमर बिना इलाज के धीरे-धीरे बढ़ रहा है।  सर्जरी के लिए लाखों रुपए की जरूरत होती है।  पैसों की कमी के कारण वह बीमारी से भी जूझ रहे हैं,अगर आप सरकारी अस्पताल में जाएंगे तो आपको सिर्फ उम्मीद ही मिलेगी।  

सरकार ने गरीबों और असहायों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने की व्यवस्था की है लेकिन विचित्र और उषा आज भी इलाज के लिए यह बुरी तरह विफल रही है।  पिता और माँ दोनों बीमार हैं और माँ का दर्द सहन नहीं कर पा रहे हैं और बेटा जगमोहन बार-बार सरकारी कार्यालय में जा कर अधिकारियों से विनती कर रहा है।  सरकार बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना कार्ड के सफल प्रबंधन का विज्ञापन कर रही है।  इस योजना के लागू होने के बाद भी इलाज के अभाव में कितने लोग बिस्तर पर हैं,परिडा़ परिवार इसका ज्वलंत उदाहरण है।  प्रशासन से भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है, आज भी  विचित्र और उषा सरकारी मदद के इंतजार में दिन गुजार रहे हैं।